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*1-भगवान कहाँ रहते हैं?*
*2-भगवान क्या करते हैं?*
*3-भगवान किसकी ओर देखते हैं*
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*एक ब्राह्मण था, वह घरों पर जाकर पूजा पाठ कर अपना जीवन यापन किया करता है. एक बार उस ब्राह्मण को नगर के राजा के महल से पूजा के लिये बुलावा आया. वह ब्राम्हण राजमहल का बुलावा पाकर खुशी खुशी पूजा करने गया | पूजा सम्पन्न कराकर जब ब्राह्मण घर को आने लगा तब राजा ने ब्राह्मण से एक सवाल किया - हे ब्राम्हण देव आप कहते है, भगवान की पूजा बात करते है तो यह बताये की भगवान कहाँ रहते है? और भगवान की नजर किस ओर है? और भगवान क्या कर सकते है.*
*राजा के सवाल सुन ब्राम्हण अचंभित हो गया और कुछ समय विचार करने के बाद राजा से कहा - हे राजन इस सवाल के जवाब के लिए मुझे समय दीजिए.*
*राजा ने ब्राम्हण को एक माह का समय दिया. राजा प्रतिदिन यही सोच मे उलझा रहता कि इसका जवाब क्या होगा. ऐसा करते करते समय बीतता गया और कुछ ही दिन शेष रह गया. समय बीतने के साथ ब्राहमण की चिंता भी बढ़ने लगी और जवाब नही मिलने के कारण ब्राह्मण उदास रहने लगा.*
*एक दिन ब्राम्हण को चिंतित देख ब्राम्हण के पुत्र ने कहा पिता जी आप इतने उदास क्यो है. तब ब्राम्हण ने कहा बेटा कुछ दिनों पहले में पूजा कराने राजमहल गया हुआ था, पूजा सम्पन्न कराकर जब मैं वापस आ रहा था तब राजा ने मुझसे एक सवाल पूछा था. राजा ने कहा था कि भगवान कहाँ रहते है? भगवान क्या कर सकते है और भगवान की नजर किस ओर है. राजा के सवाल का जवाब मुझे उस समय नही सुझा तो मैने उनसे कुछ समय मांगा था, जिसके जवाब के लिये राजा ने मुझे एक माह की समय दिया था और वह एक माह बीतने वाला है लेकिन इसका जवाब मेरे पास नही है, इसलिए मैं चिंतित हूँ.*
*ब्राम्हण की बात सुनकर उनका पुत्र बोला पिता जी इसका जवाब मैं राजा को दूंगा. आप मुझे साथ ले चलिये|एक माह पूरा हुआ तब ब्राह्मण अपने पुत्र को लेकर राजमहल गया और राजा से कहा हे राजन आपके सवाल का जवाब मेरा पुत्र देगा|*
*तब राजा ने ब्राम्हण के पुत्र से वही सवाल पूछा बताओ भगवान कहाँ रहते है, भगवान की नजर किस ओर है तथा भगवान क्या कर सकते हैं ?*
*उस ब्राम्हण पुत्र ने राजा से कहा - हे राजन, क्या आपके राज्य मे पहले अतिथि का आदर सम्मान नही किया जाता. यह सुन राजा को थोड़ा लज्जित महसूस हुआ. पहले उस बालक को आदर सत्कार के साथ स्थान दिया गया फिर पीने हेतु दास के दूध लाया गया. वह बालक दूध के गिलास पकड़कर दूध में अंगुली डालकर घुमाकर बार बार दूध को बाहर निकालकर देखने लगा.*
*यह देख राजा ने पूछा ये क्या कर रहे हो?*
*बालक ने कहा - सुना है दूध में मक्खन होता है. मैं वही देख रहा हूं कि दूध में मक्खन कहाँ है? आपके राज्य के दूध से तो मक्खन ही गायब है.*
*राजा ने कहा दूध में मक्खन होता है, परन्तु वह ऐसे दिखाई नहीं देता. जब दूध को जमाकर दही बनाया जाता है, और फिर दही को मथा जाता हैं तब जाकर मक्खन प्राप्त होता है.*
*ब्राहमण के पुत्र ने कहा- महाराज यह आपके पहले सवाल का जवाब है. जिस तरह दूध से दही और फिर दही को मथने से मक्खन प्राप्त होता है, उसी प्रकार परमात्मा प्रत्येक जीव के अन्दर विद्यमान होते है. परंतु उन्हें पाने के लिये सच्ची भक्ति कब आवश्यकता होती है.*
*👉मन से ध्यानपूर्वक भक्ति करने पर आत्मा में छुपे हुए परमात्मा का आभास होता है. राजा ब्राम्हण के पुत्र के जवाब से खुश हुआ और कहा अब मेरे दूसरे सवाल का जवाब दो, भगवान किस ओर देखते है?*
*उस बालक ने कहा राजा इसका जवाब में दूंगा परंतु मुझे इसके लिये एक मोमबत्ती की आवश्यकता है. राजा ने तुरंत मोमबत्ती मंगाई और उस बालक को दिया. उस बालक ने मोमबत्ती को जलाकर कहा राजा आप बताये - कि इस मोमबत्ती की रोशनी किस ओर हैं? राजा ने कहा इसकी रोशनी चारों दिशा में एक समान है. तब उस बालक ने कहा हे राजन यह आपके दूसरे सवाल का जवाब है.*
*👉क्योंकि परमात्मा सर्वदृष्टा है और उनकी नजर सभी प्राणियों के कर्मों की ओर परस्पर रहती है. राजा उस बालक को जवाब से अत्यधिक प्रसन्न हो गये. अब तो वे अंतिम प्रश्न के उत्तर दे लिये और भी उत्सुक हो उसे.*
*राजा ने कहा मेरे अंतिम सवाल का जवाब दो कि भगवान क्या कर सकते है?*
*बालक ने कहा - हे राजन मैं इस सवाल का उत्तर अवश्य दूंगा परंतु इसके लिये मुझे आपकी जगह पर और आपको मेरी जगह पर आना होगा. राजा को तो उत्तर जाने की उत्सुकता थी वो अपनी सहमति दे दिये. वह बालक राजा के सिहासन पर बैठा और कहा राजन आपके अंतिम सवाल का जवाब यह है, आपने कहा न कि भगवान क्या कर सकते है तो भगवान यह कर सकते कि मुझ जैसे रंक को राज सिहासन पर बैठा सकते है और आप जैसे राजा को मुझ जैसे सवाली के स्थान पर अर्थात राजा को रंक और रंक को राजा बना सकते है यह आपके अंतिम सवाल का जवाब हैं.*
राजा उस ब्राह्मण पुत्र के जवाब से अत्यधिक प्रसन्न हुए और उसे अपना सलाहकार बना लिया. भगवान हर एक जीव के ह्रदय में निवास करते है. परमात्मा के साथ प्रेम करेंगे तो वह आपको सही मार्ग दिखाएंगे. इसलिए हर जीव को पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन करना चाहिए. जिससे आप अपने अंदर के उस शक्ति से जुड़ सके जो आपके भीतर ही मौजूद है लेकिन आप उसे पहचान नहीं पा रहे.
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"हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे "
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*(गोपी रसोई वृंदावन -धार्मिक प्रसारण)*
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